7 HABITS OF HIGHLY EFFECTIVE PEOPLE

7 HABITS OF HIGHLY EFFECTIVE PEOPLE

(अति प्रभावकारी लोगो ७ आदते )

हैलो दोस्तों

दोस्तों आप सब तो जानते ही हो की किसी भी इंसान को बड़ा बनाने के लिए कुछ रूल्स फॉलो करने पड़ते ही है!या फिर कुछ कॉमन आदते होती ही है !जो सभी बड़े इंसानो में देखने को मिलती है !



वैसे भी हम कितने भी मोटिवेशनल किताबे पढ़ ले एक बार मोटिवेशन ख़तम होने के बाद हम सब वैसे ही बन जाते है जो हम मोटीवेट होंने से पहले थे !मतलब लोग अपनी आदत ज्यादा तर बदलते नहीं मज़बूरी में ही सही !बहोत सरे इंसान है जो अपनी आदते बदलते नहीं ! पर यही आदते आप  की सक्सेस एंड फैलुएर के भींच की दिवार होती है जो हमें पार करनी पड़ती है !

आदत 1 – सक्रीय बनिए (प्रोएक्टिव बने):

किसी भी वातावरण को नियंत्रित करने की यह क्षमता है। परिस्थिति के नियंत्रण में रहने की बजाए हमें परिस्थिति को नियंत्रित करना चाहिए। स्व-निर्धारण, चुनाव और निर्णय लेने की क्षमता ही आपकी परिस्थिति और हालत को सकारात्मक रूप में परिवर्तित कर सकती है।

आदत 2 – अंत को ध्यान में रखकर शुरुवात करे:


कोवे इस आदत को व्यक्तिगत लीडरशिप की आदत कहते है, जिनमे हमारा खुद का स्वयं पर नियंत्रण होना चाहिए। हमें हमेशा अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ते रहना चाहिए। ध्यान लगाने की इस आदत को विकसित कर हम व्याकुलता से बच सकते है और ज्यादा सक्रीय बन सफलता हासिल कर सकते है।

आदत 3 – प्राथमिक चीजो को महत्त्व दे:


हमें लीडरशिप और मैनेजमेंट के बीच के अंतर को समझना चाहिए। बाहरी दुनिया में लीडरशिप व्यक्तिगत दृष्टिकोण और व्यक्तिगत लीडरशिप के साथ ही शुरू होती है। हमें क्या महत्वपूर्ण है और क्या अति-आवश्यक है इस बारे में भी बात करनी चाहिए। निचे दिए गये आदेशो के अनुसार हमें कामो को प्राथमिकता देनी चाहिए: 1. जरुरी और अति आवश्यक 2. जरुरी और बहुत जरुरी नही 3. जरुरी नही और अति आवश्यक 4. जरुरी नही और बहुत जरुरी भी नही

आदत 4 – हमेशा जीत के बारे में ही सोचे:


जो बहुत जरुरी है क्योकि आपकी उपलब्धि दूसरो के साथ किये गये सहकारी संघर्षो पर निर्भर करती है। लेखक के अनुसार हमें हमेशा जीत के बारे में ही सोचना चाहिए। कभी भी हार-जीत के बारे में सोचकर लडखडाना नही चाहिए।

आदत 5 – पहले दूसरो को समझने की कोशिश करे:

यही आधुनिक दुनिया की सबसे बड़ी कहावत है। कोवे की यह आदत संचार से जुडी हुई है और यह अति प्रभावशाली और शक्तिशाली है। इस आदत को कोवे ने यह कहते हुए वर्णित किया है की, “लिखने से पहले निदान करे।” यह आदत बहुत आसान और सबसे प्रभावशाली है और साथ ही यह सकारात्मक रिश्तो को बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हमेशा खुले दिमाग से लोगो की बातो को सुनना चाहिए और फिर अपने प्रभावशाली तरीको से अपने विचार को लोगो तक पहुचाने की कोशिश करे। इससे एक सकारात्मक समस्या को सुलझाने वाले वातावरण का निर्माण होंगा।

आदत 6 – ताल-मेल बैठाना:

एक ऐसा तत्व जो हमें बताता है की सम्पूर्ण हमेशा उसके छोटे-छोटे भाग से महान और बड़ा है। इसीलिए हमें हमेशा सम्पूर्ण लक्ष्य को पूरा करने की तरफ ध्यान देना चाहिए। साथ ही प्रदर्शन करते समय हमारे विचार और हमारी क्रिया के बीच ताल-मेल बैठना भी बहुत जरुरी है।

आदत 7 – कुल्हाड़ी को तेज करे:

यह आत्म नवीकरण की आदत है और इसके भीतर ही आपकी सभी दूसरी आदते समावेशित है। इन आदतों का उपयोग कर आप मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से विकसित हो सकते हो। कोवे ने खुद को भी चार भागो में विभाजित किया है: आध्यात्म, मानसिकता, शारीरिक और सामाजिक/भावुकता, और इन सभी का समान रूप से विकास होना बहुत जरुरी है। स्टीफन कोवे की सेवन हैबिट्स किताब में जीवन के नियमो के आसान उपयोग के बारे में बताया गया है। यह सारि आदतें समान रूप से शक्तिशाली और प्रभावशाली है, जिनका उपयोग कर हम सही रास्तो पर चल सकते है। बहुत से लोग कोवे के भाषणों और लेखो से भी प्रेरित होकर इन आदतों को अपनाने लगे है। कोवे के अनुसार यदि आप अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव चाहते हो तो आपको अवश्य इन आदतों को अपनाना चाहिए।

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