Rich Dad Poor Dad

Updated: Mar 27

रिच डैड पुअर डैड ! RICH DAD POOR DAD     (रोबर्ट टी कियोसाकी)



ये किताब रोबर्ट टी कियोसाकी द्वारा लिखी गयी किताब है जिसमे उन्होंने एक स्टोरी बताई है !जिसमे आप पैसे कमाने नियम को सीखेंगे !



अगर आप भी रिच बनना चाहते है या फिर अपने बच्चो को ये सब सीखना चाहते है तो ये किताब सिर्फ आपके  लिए है !






रोबर्ट नाम का एक लड़का था जिसके २ बाप थे एक उसका सगा बाप था! और एक उसका मुबोला बाप था यानि उसके दोस्त पिता जिन्हे ओ अपना बाप मानता था !पहले वाले ने  P.H.D की थी पर दूसरे वाले ने ८ वी भी नहीं पास की थी !दोनों बहोत ही स्मार्ट और हार्ड वर्किंग थे पर दोनों की सोच बहोत ज्यादा अलग थी !और दोनों रोबर्ट को अलग बाते सिखाते थे !पहला बाप बोलता था पैसा सारे फसाद की जड़ है !और दूसरा बाप बोलता था की पैसा न होना सारे फसाद की जड़ है !



पहला उसे हमेशा महंगी चीजेा के बारे में न सोचने की सलह देता और दूसरा कहता की सोचो और अलग अलग रस्ते निकालो ताकि तुम वो महंगी चीजे खरीद सको !ये करने तुम्हारा दिमाग तेज होगा और नए नए आईडिया भी मिलेगी !




पहला कहता तू खूब पढाई कर और अछि कपनी में नौकरी कर तो दूसरा कहता तू खूब पढाई कर और कंपनी स्टार्ट कर ता की तू दुसरो को नौकरी दे सके !रोबर्ट हमेशा दूसरे बाप की बातो पर गौर करता रहा जो की बाद में मायामी फ्लोरिडा का सबसे आमिर इंसान बना और खुप पैसे भी कमाए !पर उसका खुद का बाप गरीब और कर्जे में ही रहा!



रोबर्ट ने उसके आमिर बाप से जो एक इम्पोर्टेन्ट चीज सीखी वो थी फाइनेंसियल लिटरसी (financial literacy )

जिसका मतलब है Assets and Liabilities के बिच का डिफ्रेंस जानना !







Assets :- मतलब ऐसी कोई भी चीज जो आपको पैसे बनाके दे या आप के जेब में पैसे डाले !





Liabilities :- ऐसी कोई भी चीज जो आपके पैसे लेले या आपके पैसे ख़तम करे !





"आमिर लोग इसलिए आमिर होते है क्योकि वो अपने एसेट्स बनाते है और गरीब लोग गरीब रहते है क्योकि वो बस लायबिलिटी पर खर्चा करते है "!


अब एक कहानी अपनी जिंदगी की !



रमेश और सुरेश दोनों दोस्त थे ! रमेश को जब भी सैलरी मिलती थी वो मेहगी मेहगी चीजे खरीदता था! जैसेकि नया मोबाइल,बाइक,कपड़े इत्यादि जो की बस उसके जेब से पैसे जाने के सोर्स थे न की आने के वो सब लाएबिलिटीज़ थे जो उसका पैसा ख़तम कर रहे थे जैसे के उसके मैंटेनस वगेरा के लिए  !और सूरेश को जब सैलरी मिलती वो इन्वेस्ट कर देता !स्टॉक्स ,शेयर, बांड्स, रियल इस्टेट जो की एसेट्स थे जो उसको और पैसे बनके दे रहे थे ! और उसको उससे जो पैसे मिलते औ उसे भी इन्वेस्ट कर देता !और उसके प्रॉफिट में से वो उसकेा सबसे ज्यादा जिस चीज की जरुरत हो वो बस उसे ही खरीदता !जो की उसे आगे और पैसे बनाके दे !

२ साल बाद सुरेश करोड़पति बन गया पर रमेश जबकि रमेश वैसाही अपने काम सैलरी को कोसता रह गया और कहता था की कम सैलरी उसके गरीब रहने का कारन है !


एक गरीब इंसान का कॅश फ्लो इस तरह का होता है की


गरीब = उसको पैसे मिलते है ====> और वो पैसे उसके जरुरी खर्चो में ख़त्म हो जाते है !


मिडल क्लास इंसान = उसे पैसे मिलते है ====> वो पैसे जरुरी खर्चो में और लिएबिलिटीज़ में खर्च करता है !


(इसीलिए मिडल क्लास और गारिब में ज्यादा फरक नहीं है ) मोस्टली मिडिल क्लास लोगो ऐसे लगता है की उनका घर उनका एसेट है पर ऐसा नहीं होता !अगर वो उसे भाड़े पर दे देता है तब वो उसका एसेट होता !






आमिर = उन्हें पैसे मिलते है ====>वो उस पैसे से एसेट बनाते है और उन एसेट्स जो पैसा मिलता है उससे वो खर्चा करते है !इसीलिए वो ज्यादा आमिर होते जाते है !





इस बात से कोई फरक नहीं पड़ता की आप कितना कमा रहे हो !फरक इस बात से पड़ता हे की वो आप कहा इन्वेस्ट कर रहे हो !

आपको कंस्यूमर की सोच से बहार आके इन्वेस्टर की सोच अपनानी पड़ेगी !

लोगो को लगता है की सैलरी बढ़ेगी तब हमारे सरे प्रोब्लेम्स ख़तम हो जायेंगे पर ऐसा नहीं होता सैलरी बढ़ने पर हमारा खर्चा भी बढ़ जाता है !हम और बेहतर जिन्दी की अपेक्षा करने लगते है !और ज्यादा महंगी चीजे खरीदते है !

ये सारी बाते आगर आपको ज्यादा बेहतर तरीकेसे  समझनी है तो निचे दिए गए लिंक से आप बुक को खारिद सकते है !

जो की आपकी जीवन को बदलने में आपकी बहोत मदत करेंगी !



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