THE 80/20 PRINCIPAL

THE 80/20 PRINCIPAL

(80/20 प्रिन्सिपल) BY रिचर्ड कोच

मैं आपको पुस्तक की शुरुआत में बताऊंगा कि यह पुस्तक किस सिद्धांत पर आधारित है!लेखक ने इस किताब में बताया है कि हमारे 80% परिणाम हमारी 20% कोशिशों पर निर्भर करते हैं ! 80/20 Principle कम खर्च में ज्यादा हासिल करने का एक रहस्य है |

यह नियम कहता है कि 80% परिणामों का कारण केवल 20% कार्य होते हैं | 

जैसे कि समाज में 80% गैर कानूनी काम केवल 20% लोग करते हैं | 

सड़क पर होने वाली 80% दुर्घटनाओं के लिए केवल 20% लोग जिम्मेदार होते हैं | 

आप जो गाड़ी चलाते हैं उसका इंजन केवल 20% ऊर्जा ही उपयोग करता है और 80% ऊर्जा इंधन को जलाने में खर्च हो जाती है |

इससे आपको ये तो पता चल ही गया होगा की ये किताब हमें क्या बताना चाहती है!

इस किताब में ऐसे ९ सिद्धांत है जो आपको में बहोत ही छोटे और  शब्दों में बताऊंगा !


१) A minority of inputs lead to a majority of outputs :-

हम अगर कपड़ो के बारे बात करे तो ! आप देखेंगे कि आपकी अलमारी में कुछ ऐसे कपड़े होंगे जो आपको बहुत पसंद होंगे उन्हें आप बार बार पहनते हैं और कुछ कपड़े ऐसे भी होंगे जिन्हें आप एक या दो बार पहन कर दोबारा नहीं पहनते ! कहने का मतलब यह है कि ऐसे बहुत कम कपड़े होते हैं जिन्हें आप ज्यादा पहनते हैं | आप की अलमारी में केवल 20% कपड़े ऐसे होते हैं जिन्हें आप ज्यादातर पहनते हैं |

२) A minority of causes create a majority of effects :- 


अगर आप शेयर मार्किट में इन्वेस्ट करते हो तो सोचो की आपके फायदे या नुकसान कुछ लिए गए फैसलों पर होते है !सारे फैसलों पर नहीं !मतलब २०% फैसलों पर ही आपका फायदा या नुकसान तय होता है!८०% पर नहीं !


३) A minority of efforts lead to a majority of results :-


हम अगर स्कूल की बात करे तो !स्कूल में हमें जो सिखाया जाता है उसका २०% ही हमें आगे जेक पैसे कमाने में उपयोगी होता है !अगर सॉफ्टवेयर इंजीनियर डिग्री लेके कोडिंग सिखता है तो  कोडिंग ही पैसे कमाने में हेल्प करती है ! बाकि सब हमें मालूम होते हुए भी हमें फायदा नहीं होता !

४)The Critical Few – identify and build upon the 20% of efforts that produce 80% of the results:-


चाहे आप कोई नौकरी कर रहे हो, या बिजनेस कर रहे हो अपने जीवनसाथी की तलाश कर रहे हो यहां किसी रिश्ते को सुधारने की कोशिश कर रहे हो , किसी भी कार्य में केवल कुछ ही बातें महत्वपूर्ण होती हैं और 80% बातें ऐसी होती हैं जिनसे कोई फर्क नहीं पड़ता |

अगर कोई व्यक्ति किसी रिश्ते को सुधारने की कोशिश कर रहा हो तो सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि उसका रिश्ता खराब क्यों है | ज्यादातर लोग अपना 80% ध्यान दूसरों की गलतियों पर देते हैं जिसके कारण उनके रिश्ते खराब हो जाते हैं | अगर आप अपना 20% ध्यान भी दूसरों की अच्छाइयों पर लगाएंगे तो निश्चित तौर पर ही आपके रिश्ते सुधर जाएंगे !

५)  Most of what we do is low value – eliminate or reduce the 80% of efforts that produce poor results:-


किसी भी काम में अपने समय और साधनों को व्यर्थ करने के बहुत से तरीके होते हैं |  इसलिए जो भी कार्य महत्वपूर्ण नहीं है उसे अपनी लिस्ट से हटा दें या उसे महत्वपूर्ण कार्यों को करने के बाद करें |

हर एक ईमेल का जवाब देने का मतलब है अपने समय को व्यर्थ करना | किसी भी संस्था में कर्मचारी अपना 80% समय अनावश्यक कार्यों को करने में खर्च करते हैं और उनके 20 % कार्य ही संस्था की उत्पादन निर्धारित करते हैं |

६) In business, focus on the products and customer that make you the most money, and minimize or eliminate the rest :-

रिचर्ड कोच कहते हैं कि आप अपने अच्छे ग्राहकों को पहचानिए और उन्हें जितनी हो सके उतनी अच्छी सेवाएं दे | ऐसे ही ग्राहकों को लुभावने ऑफर और अच्छी सेवाएं देने के लिए आप जो कुछ कर सकते हैं वो करिए, क्योंकि ऐसे ग्राहकों के जरिए ही आपके बिजनेस के लिए नए ग्राहक आएंगे | ऐसे ग्राहक जब बाहर जाकर आपके बिजनेस के उत्पादन और सेवाओं की तारीफ करते हैं तो वह आपके बिजनेस के लिए अच्छी मार्केटिंग करते हैं |२०% लोग ही हमारा बिज़नेस  लिए बहोत मदत करते है !

७) In life, focus on the activities that produce the majority of life satisfaction:-


एक शोध के मुताबिक रोज़ करने वाले कार्यों का आपके जीवन की ख़ुशियों और संतुष्टि में आपकी संपत्ति से ज्यादा महत्व होता है | दूसरी और आपको ऐसे कार्य नहीं करने चाहिए जिनसे आपको खुशी और संतुष्टि नहीं मिलती | जैसे कि लोगों को ज्यादा देर तक बस या ट्रेन में सफर करना पसंद नहीं होता | अगर आपको रोज ऑफिस जाने के लिए बस या ट्रेन से सफ़र करना पड़ता है तो आप अपना घर अपने ऑफिस के नजदीक शिफ्ट कर सकते हैं | इससे आपको रोज भीड़ से भरी बस या ट्रेन में सफ़र नहीं करना पड़ेगा और आपका समय भी बचेगा | अगर आपको ऑफिस के पास घर शिफ्ट करना महंगा भी पड़े तो भी यह एक सकारात्मक फैसला होगा क्योंकि जब आप रोज भीड़ में सफर नहीं करेंगे तो इसका आपके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव होगा |

८ ) A minority of decisions will produce the majority of your results: choice of work, debts, investments, relationships:-


आपको हर फैसला सोच समझकर लेना चाहिए अगर जल्दबाजी में लगे तो बहोत नुकसान उठाना पड़ेगा !

उदाहरण के तौर पर घर खरीदना किसी भी व्यक्ति के जीवन का एक बहुत बड़ा आर्थिक फैसला होता है, इसलिए अगर आप भी घर खरीदना चाहते हैं तो जल्दबाजी में कभी फैसला ना ले | घर खरीदने से पहले आपको घर के बारे में पूरी जांच पड़ताल करनी चाहिए, अपना आर्थिक बजट देखना चाहिए, और अगर आप बैंक से लोन लेकर घर खरीद रहे हैं तो लोन के लिए भी पूरा समय लगाकर जांच पड़ताल करनी चाहिए, जिससे कि आपको कम से कम ब्याज दर पर लोन मिल जाए | आपको यह देखना होगा कि आप को कम ब्याज दर पर लोन कहां से मिलेगा क्योंकि अगर आप 1% कम ब्याज दर पर लोन लेते हैं तो 30 साल के लोन में आपको ब्याज में हजारों और लाखों रुपए का फायदा हो सकता है |

९) More effort does not equal more reward – focus only on what is crucial, and ignore the rest:-

अगर आप अपने जीवन के 30 साल रेगिस्तान में गड्ढा खोदने में लगाएंगे तो कोई आप पर ध्यान नहीं देगा, दूसरी और अपने जीवन के वही 30 साल अगर आप किसी बीमारी का इलाज ढूंढने में लगाएंगे तो आपके काम को सराहा जाएगा और important समझा जाएगा | आप जीवन में जो भी काम करने का फैसला करते हैं, शुरू में थोड़ा समय उस काम पर रिसर्च करने में लगाएं | जब आप जीवन में कोई भी लक्ष्य निर्धारित करते हैं तो आपको यह पता लगाना होगा कि कौन से कार्य करने से आप अपने लक्ष्य को जल्दी प्राप्त करेंगे और कौन से कार्य करने से आपका समय और ऊर्जा बर्बाद होंगे | आपको अपने लिए दो तरह की लिस्ट बनानी चाहिए | पहली लिस्ट का नाम रखिए “focus-on” लिस्ट – इस लिस्ट में आप उन सभी कार्यों के बारे में लिखिए जो आपके लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए important है, आपको सबसे अधिक ध्यान इन्हीं कार्यों को देना है | आपको एक और लिस्ट बनानी होगी जिसका नाम आप रखेंगे “Not-To-Do” लिस्ट – इस लिस्ट में आपको उन सभी कार्यों के बारे में लिखना है जो आपके लक्ष्य के लिए important नहीं है और जिन्हें करने से केवल समय और ऊर्जा व्यर्थ होते हैं | आपको अपना ध्यान उन्हीं कार्यों पर लगाना है और अपना समय और ऊर्जा उन्हीं कार्य पर खर्च करने हैं जिन्हें आपने “focus-on” लिस्ट मे लिखा है | आपको “Not-To-Do” लिस्ट में लिखे हुए कार्यों पर ध्यान नहीं देना है | जब आप कोई लक्ष्य निर्धारित करेंगे और उसके लिए यह दो सूचियां बनाएंगे तो आप स्पष्ट होंगे कि आपको कौन से कार्य करने हैं और कौन से नहीं | ऐसा करने से लंबे समय में आप के समय, धन और आपकी उर्जा की बड़े स्तर पर बचत होगी |

अब  थोड़ा ये भी सोचो !




1- दुनिया की 80% दौलत (Wealth) केवल 20% लोगों के पास है जबकि 20% दौलत 80% लोगों के पास है।

2- आप अपने 20% कपड़े 80% टाइम तक पहनते हो जबकि 80% कपड़े आप 20% समय तक पहनते हो।

3- आपके Mobile में जितने भी contacts हैं, उनमे से 20% contacts के लिए आप 80% call करते हो जबकि 80% contacts के लिए आप 20% call करते हो।

4- आपके 20% दोस्त या रिलेशन ही आपको 80% खुशी (Happiness) देते हैं जबकि 80% दोस्त या रिलेशन आपको 20% खुशी देते हैं।

5- केवल 20% सड़कों पर ही 80% ट्रैफिक होती है और 20% ट्रैफिक 80% सड़कों पर होती है |

6- हमें 80% मिनरल और खाद्य पदार्थ केवल 20% जमीन से मिलते हैं और 80% जमीन से केवल 20% मिनरल्स और खाद्यपदार्थ मिलते हैं |

7- केवल 20% लेखकों द्वारा लिखी गई पुस्तकें 80% बिकती हैं, और 80% लेखकों द्वारा लिखी गई पुस्तकें केवल 20% बिकती हैं |

8- केवल 20% Articals ही 80% समय में पढ़े जाते हैं और 80% ब्लॉग्स को केवल 20% समय में पढ़ते हैं |

आपको ये बुक जरूर  पढ़नी चाहिए !आप AMAZON से इसे खरीद सकते हो !



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